मैसूर दशहरा में गोल्डन हावड़ा उठाने वाले अर्जुन हाथी का दर्दनाक मौत से लोगों के आंखों में आंसू आ गए

दशहरा पर जुलूस निकालने के दौरान सोने की डोला ले जाने वाले हाथी अर्जुन सोमवार सकलेशपुर में यसलूर के पास एक दूसरे हाथी के साथ लड़ते वक्त मर गया। लड़ते हुए मरने वाले हाथी अर्जुन की उम्र 64 साल थी। अचानक हुई इस हादसे में अर्जुन के मौत पर वन विभाग के कर्मियों ने पूरी तरीके से टूट गया है। किसी किसी ने अर्जुन के शरीर पर शिर पेट के रो भी रहा है।

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खबरों के मुताबिक वन विभागअर्जुन को साथ में लेकर सकलेशपुर, एलर, बेलूर, और यसलूर रेंज में कुछ हाथियों के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे थे। जो हाथी कुछ दिनों से उसे इलाके में परेशान कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन चलने के समय एक जंगली हाथी ने अर्जुन पर जोरदार हमला किया। अर्जुन के पेट में चोट लगने के कारण अर्जुन की मौत हो गई। इस घटना के बाद वन विभाग द्वारा इस ऑपरेशन को फिलहाल अभी के लिए रोक दिया।

अर्जुन • हाथी • मैसूर दशहरा • गोल्डन हावड़ा • कर्नाटक

अर्जुनवन विभाग के लिए एक खास हाथी थे। दशहरा जुलूस के दौरान 2019 तक कुल 8 बार 750 किलोग्राम गोल्डन हावड़ा उठाया, अखरीबर गोल्डन हावड़ा उठाने के समय वह 60 वर्ष के हो गए थे। इसके अलावा अर्जुन ने वन विभाग के कर्मचारियों के साथ ऐसे ही ऑपरेशन में कई सारे हाथी पकड़ने में मदत किया।

ऑपरेशन के दौरान

उसे दिन ऑपरेशन के समय वन विभाग के कर्मचारियों ने एक हाथी को पहचान की जिसको पकड़ता था। क्योंकि पहले से ही टीम का नजर 12 हाथियों की एक झुंड पर पड़ी थी। प्रक्रिया के अनुसार जिस हाथी को पकड़ने के लिए तय किया गया था, उसको झुंड से अलग करना पड़ता था।

ऐसा कहा जाता है कि कर्मचारियों ने पालतू हाथियों की मदद से हाथी को अलग किया और जानवर को बेहोश करने के लिए ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट चलाया। ट्रैंक्विलाइज़र के प्रभाव में, हाथी ने पालतू हाथियों पर हमला कर दिया। जबकि अन्य पालतू हाथी पीछे हट गए, अर्जुन दृढ़ता से सामना करने के लिए खड़ा रहा।

खतरे की आशंका से केयरटेकर और टीम के अन्य सदस्य वहां से चले गए। अर्जुन ने हाथी के साथ संघर्ष किया, गहरे घाव झेले और कुछ मिनट बाद दम तोड़ दिया। मौत से केयरटेकर और स्टाफ सदस्यों में शोक छा गया।

अर्जुन की देखभाल करने वाले वेणु को जब मौत के बारे में पता चला तो वह बेहोश हो गए। उन्हें सकलेशपुर के एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है। वह वर्षों से इस जानवर से जुड़े हुए हैं।

ऑपरेशन

24 नवंबर से बेलूर तालुका पर 9 जंगली हतियों पर रेडियो कॉलर लगाने की ऑपरेशन शुरू हुआ था। उसे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिएकई सारे पालतू हाथियों के साथ अर्जुन को भी लाया गया था।

वन विभाग के इस टीम ने अब तक तीन मादा हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाने और उसे स्थानांतरण के काम में सफल रहा है। सबसे पहले इन हाथियों को बेहोशी गोली से बेहोश किया जाता है, उसके बाद उनके गले में रेडियो कलर लगाया जाता है ताकि उनकी हरकतों को ट्रैक किया जा सके।

रेडियो कॉलर लगाने के बाद जंगली हाथी की झुंड से प्रभावित क्षेत्र में स्थानीय जनता को सुचित्र करता है ताकि कोई दुर्घटना ना घाट जाए। क्योंकि उसे इलाके में पिछले कई सालों से जंगली हाथी के झुंड ने फसलों की नुकशन करने से किसानों को नुकसान सहना पड़ता है। इसीलिए लंबे समय से किसान भी सरकार से जंगली हाथी को हटाने की मांग कर रहे थे। और इसी ऑपरेशन को अंजाम देने के समय जंगली हाथी से लड़ते वक्त अर्जुन का मत हो गया है।

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